गुरुवार, अगस्त 11, 2011

टेलीफोन पर बातचीत

द रेड स्क्विरल, आर्चिबाल्ड थोर्नबर्न
The Red Squirrel, Archibald Thornburn

प्यारी-सी, नन्ही-सी गिलहरी, क्या तुम मुझे सुन सकती हो, 
क्या तुम समझ पाती हो जब मैं तुम से बात करता हूँ,
क्या तुम महसूस कर सकती हो कि मैंने तुम्हें उठाया हुआ है 
और हम एक साथ आँगन पार कर रहे हैं
तुम्हे दफ़नाने के लिए उस गड्ढे में जहाँ मिट्टी नर्म व काली है,
क्या तुम सुन पा रही हो कीड़े-मकौडों को, हवा की साँसों को,
क्या तुम सोचती हो; अमरत्व क्या है?
अमरत्व का अर्थ क्या होता है? शायद किसी 
उड़ते विमान की क्षणिक छाया, मंद-मंद बारिश.
क्या तुम महसूस कर सकती हो
कि मैं तुम्हारे बारे में सोच रहा हूँ,
कि कैसे अब तुम नहीं हो,
कि बाकी सब के बीच अब तुम जीवित नहीं रही;
तुम अनूठी थी, जैसे हम सब अनूठे है.
उदाहरण के लिए, मैं मानता हूँ कि मैं एक पिता हूँ,
मानता हूँ कि मैं एक पुत्र हूँ.


-- रयून क्रिस्तियानसन 


रयून क्रिस्तियानसन (Rune Christiansen ) नार्वे  के कवि व उपन्यासकार हैं. 23 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता-संग्रह प्रकाशित हुआ ' वेअर द ट्रेन लीव्ज़ द सी '. तब से उन्होंने 9 कविता संकलन व ६बेहद सराहे गए उपन्यास लिखे हैं. उन्हें कई साहित्यिक पुरुस्कार व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अन्य भाषाओं के प्रसिद्द कवियों जैसे एलें बोसके व युजीनियो मोंताले के साथ काम भी किया है.
इस कविता का मूल नार्वेजियन से अंग्रेजी में अनुवाद ऐग्नेज़ स्कॉट लैंगलैंड ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

मंगलवार, अगस्त 09, 2011

इतवार

ला पौन्से, ओग्यूस्त रोदें
La Pensée , Auguste Rodin
एवेन्यू गोबेलां के पेड़ो की कतारों के बीच से
मेरा हाथ पकड़ कर ले जाती है
एक संगमरमर की मूर्ती
आज इतवार है और सिनेमाघर खचाखच भरे हैं
पेड़ की टहनियों पर बैठे पंछी इंसानों को देखते हैं
और मूर्ती मुझे चूम लेती है
मगर कोई नहीं देखता 
सिवाय एक अंधे बच्चे के
जो ऊँगली से इशारा करता है
हमारी ओर.


-- याक प्रेवेर



याक प्रेवेर  ( Jacques Prévert )फ़्रांसिसी कवि व पटकथा लेखक थे. अत्यंत सरल भाषा में लिखी उनकी कविताओं ने उन्हें फ्रांस का विक्टर ह्यूगो के बाद का सबसे लोकप्रिय कवि बना दिया. उनकी कविताएँ अक्सर पेरिस के जीवन या द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के जीवन के बारे में हैं. उनकी अनेक कविताएँ  स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं व प्रसिद्ध गायकों द्वारा गायी गयी  हैं. उनकी लिखी पटकथाओं व नाटकों को भी खूब सराहा गया है. उनकी यह कविता उनके सबसे प्रसिद्द कविता संग्रह 'पारोल' से है.

इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

रविवार, अगस्त 07, 2011

ईश्वर से प्रश्न

द कैथीड्रल, ओग्यूस्त रोदें
The Cathedral, Auguste Rodin 

हे ईश्वर :
जब हम प्यार करते हैं हम पर क्या विजय पा लेता है?
हमारे भीतर गहरे कहीं क्या होने लगता है?
हमारे अन्दर क्या टूट जाता है?
ऐसा कैसे है कि जब प्यार करते हैं 
लौट जाते हैं हम एक बार फिर बचपन में ?
ऐसा कैसे होता है कि पानी की एक बूँद 
बन जाती है सागर 
ताड़ के पेड़ और ऊंचे हो जाते है 
समुद्र का पानी और मीठा 
सूरज एक कीमती हीरों-जड़ा कंगन कैसे बन जाता है
जब हम प्यार करते हैं?

हे ईश्वर :
जब अचानक प्यार घटित होता है 
वह क्या है जो हम अपने में से जाने देते हैं?
वह क्या है जो हम में पैदा हो जाता है?
क्यों हम नन्हे स्कूली बच्चों-से 
सरल और मासूम हो जाते हैं?
और ऐसा क्यों होता है 
कि जब हमारी प्रियतमा हँसती है 
दुनिया करती है हम पर मोगरे की बारिश 
ऐसा क्यों होता है 
कि जब वह हमारे काँधे पर सर रख कर रोती है 
दुनिया एक दुःख भरा पंछी बन जाती है?

हे ईश्वर :
उसे क्या कहते हैं, उस प्यार को
जिसने सदियों-सदियों आदमियों को मार डाला है, 
किलों को जीता है 
शक्तिशाली को नीचा दिखाया है 
निरीह और सीधे-सादे लोगों को पिघलाया है?
ऐसा कैसे होता है कि हमारी प्रेमिका के बाल 
सोने का बिछौना बन जाते हैं
और उसके होंठ मदिरा और अंगूर?
ऐसा कैसे है कि हम आग में से गुज़रते हैं
और आंच का आनंद उठाते हैं?
हम बंदी कैसे बन जाते हैं जबकि हमने प्यार 
विजयी राजा होने के बाद किया होता है?
उस प्यार को हम क्या कहते हैं 
जो चाक़ू की तरह हमारे अन्दर घुस जाता है ?
क्या वह एक सरदर्द है?
क्या वह पागलपन है?
ऐसा कैसे होता है कि बस एक ही पल में 
दुनिया एक हरी-भरी वादी...
एक मधुर-सी जगह बन जाती है
जब हम प्यार करते हैं?

हे ईश्वर :
हमारी बुद्धि को क्या हो जाता है? 
हमें क्या हो जाता है?
ललक का एक पल बरसों लम्बा कैसे हो जाता है 
और माया प्यार में यथार्थ कैसे बन जाती है?
कैसे साल के सप्ताह एक-दूसरे से जुड़े नहीं रह पाते?
ऐसा कैसे होता है कि प्यार मौसमों के भेद मिटा देता है?
तो सर्दियों में गर्मियाँ हो जाती हैं 
और जब हम प्यार करते हैं 
आकाश के बागीचों में गुलाब खिलने लगते हैं ?

हे ईश्वर :
हम प्यार के सामने समर्पण कैसे करें,
कैसे सौंप दे उसको अपने अंतर्मन की चाबी
उसके सामने दिए जलाएँ, सुगंध ले जाएँ 
ऐसा कैसे होता है कि क्षमा मांगते हुए,
हम उसके पैरों में गिर जाते हैं 
ऐसा कैसे होता है कि
हम चाहते हैं उसकी रियासत में दाखिल होना
वह हमें जो भी करे 
वह जो भी करे उसके आगे समर्पित होना.

हे ईश्वर :
अगर तुम सच्चे ईश्वर हो 
तो हमें हमेशा प्रेमी रहने देना.


-- निज़ार क़ब्बानी 


 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 की उम्र से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह छप चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे. 
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद लेना जाय्युसी और डब्ल्यू एस मर्विन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

शुक्रवार, अगस्त 05, 2011

संवेदना

व्हीट फील्ड विद साएप्रस, विन्सेंट वान गोग
Wheat Field With Cypress, Vincent Van Gogh


गर्मियों के नीली शामों में, 
पगडंडियों से मैं गुजरूँगा,
उगते गेहूं का गुदगुदाया, 
कटी घास पर चलता, सपनों में खोया, 
मैं पैरों के नीचे से उठती 
ठंडक महसूस करूँगा, और खुले सर पर 
ठंडी हवाओं को बहने दूंगा.

मैं बोलूँगा नहीं, कुछ सोचूंगा भी नहीं :
मगर एक अनंत प्यार उमड़ेगा 
मेरी आत्मा में,
और मैं निकल जाऊँगा दूर, बहुत दूर, 
एक बंजारे की तरह, 
प्रकृति के साथ भी वैसे ही मग्न 
जैसे किसी औरत के साथ होता हूँ.


-- आरथ्यूर रिम्बो 




Arthur Rimbaud, E. Carjat, 1872 - Wikimedia Commons  आरथ्यूर रिम्बो ( Arthur Rimbaud ) 19 वीं शताब्दी के अंत के फ्रांसीसी कवि थे. उनका सारा लेखन 21 वर्ष की आयु से पहले ही हो गया था. विक्टर ह्यूगो उन्हें 'इन्फंट शेक्सपियर' कहा करते थे. वे बहुत अच्छे विद्यार्थी थे मगर उनका बचपन दुखों से भरा था. 16 वर्ष की आयु में वे घर से भाग कर पेरिस आ गए, जहाँ उनकी मुलाकात उम्र में बड़े व स्थापित कवि पॉल वर्लेन से हुई. अपने 17 वें जन्मदिन से पहले ही उनकी लम्बी कविता 'द ड्रंकन बोट' प्रकाशित हुई, जो उनकी स्वयं की आद्यात्मिक भटकन और खोज का रूपक थी. उसी वर्ष उनकी किताब 'ए सीज़न इन हेल' भी प्रकाशित हुई जिसकी खूब आलोचना हुई. दुखी हो कर रिम्बो ने अपना लिख हुआ सब जला दिया. अब तक वे अपने प्रेमी वर्लेन से भी उकता चुके थे जिन्होंने उन्हें अपने पास रोके रखने के लिय उन पर गोली तक चला दी थी. 19वर्ष की आयु में पूरे यूरोप में भटकने के बाद, वे अफ्रीका चले गए जहाँ वे कोई कारोबार करते रहे. कुछ वर्ष बाद उन्हें मृत समझ वर्लेन ने उनका कविता-संकलन 'इल्यूमिनेशंज़' प्रकाशित करवाया, जिसने साहित्य जगत में सनसनी मचा दी. रिम्बो अब प्रतिष्ठित कवियों में गिने जाने लगे थे मगर अपने यश में उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं रही थी. 37 वर्ष की आयु में उनका कैन्सर से देहांत हो गया.

इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

बुधवार, अगस्त 03, 2011

बारिश

व्हीट फील्ड इन रेन, विन्सेंट वान गोग
Wheat Field In Rain, Vincent Van Gogh

एक शहर जो इतना जर्जर हो गया था
उसके आकाश में 
जब मैं अपना छाता खोलता हूँ
मैं पहुँच जाता हूँ उन गाँव के दिनों में 
उस लड़की के पास    
बारिश में झुकी हुई
धान रोपती हुई 
जो अचानक ही औरत बन गयी थी 
बारिश में खड़ी औरत   
अभी भी तन कर खड़ी हुई 

जिसने बार-बार कहा था   
एक आदमी से 
जिसका नाम वह नहीं जानती थी 
" भाग क्यों रहे हो?
      छाता क्यों लिया हुआ है?
लोह पुरुष को ही जंग लगता है बारिश में."


-- अली अब्दोलरेज़ेई


अली अब्दोलरेज़ेई ( Ali Abdolrezaei ) ईरान के कवि हैं. वैसे वे मेकैनिकल इंजीनियर  हैं, मगर 17वर्ष की आयु से ही वे कवि के रूप में पहचाने जाने लगे और जल्द ही क्रान्ति के बाद के ईरान के प्रसिद्द कवियों में गिने जाने लगे. ईरान में रहते हुए उनके 7संकलन ही प्रकाशित हो पाए. कड़ी सेंसर -व्यवस्था ने उनका ईरान में रहकर लिखना, पढ़ाना व सभाओं में बोलना, सब बंद कर दिया. 2002 में उन्होंने ईरान छोड़ दिया और अनेक देशों में भटक कर अंततः लंदन में  रहने लगे. उनकी लेखन शैली पारंपरिक फ़ारसी कविता से बहुत भिन्न है. उनकी कविताएँ अधिकतर वह व्यग्रता, अलगाव और कुछ खो जाने का दुःख दर्शाती हैं, जो की सभी विस्थापित ईरानियों को महसूस होता होगा. अब तक उनके 20 कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं व उनका अनेक भाषाओँ में अनुवाद भी हो चुका है. 
इस कविता का मूल फ़ारसी से अंग्रेजी में अनुवाद अबोल फ्रुशान ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

सोमवार, अगस्त 01, 2011

शाम के झुटपुटे में...

लैंडस्केप एट सनसेट, विन्सेंट वान गोग
Landscape At Sunset, Vincent Van Gogh 

शाम के झुटपुटे में ही आँखें सचमुच देखने लगती हैं.
इस से पहले कि रात उन्हें बुझा दे, फूलों के रंग 
चमकीले और सुन्दर होने लगते हैं: 
कारनेशन, पीले गुलाब, मैदानी फूल और बटरकप.
हवा थम गयी है और आकाश 
-- वह फीकी, लगभग अदृश्य पृष्ठभूमि 
हमारे सब कार्यकलापों की, आने-जाने की --
अचानक ही यहाँ है, 
पेड़ों के शिखरों और बिजली के खम्बों के ठीक ऊपर,
पत्तियों में से और घर के ऊपर से 
अपनी पूरी गहराई और नीलेपन में झिलमिलाता हुआ.
उपभवन के पीछे, सांझ का तारा शुक्र दिखाई देता है;
और कुँए की जगत की दाहिनी ओर बृहस्पति :
कभी दोनों देवता थे, अब दो तारे हैं.


-- यान काप्लिन्स्की


Author: Estonian Literary Magazine





यान काप्लिन्स्की ( Jaan Kaplinski )एस्टोनिया के कवि, भाषाविद व दार्शनिक हैं व यूरोप के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं. वे अपने स्वतंत्र विचारों व वैश्विक सरोकारों के लिए जाने जाते हैं. उनके कई कविता-संग्रह, कहानियां, लेख व निबंध प्रकाशित हो चुके हैं. उन्होंने कई भाषाओँ से कई भाषाओँ में अनुवाद किये है व उनके स्वयं के लेखन का भी कई भाषाओँ में अनुवाद हुआ है. यह कविता उनके संकलन 'ईवनिंग ब्रिनग्ज़ एवरीथिंग बैक ' से है.
इस कविता का मूल एस्टोनियन से अंग्रेजी में अनुवाद फियोना सैम्प्सन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शनिवार, जुलाई 30, 2011

निशा गीत


रोड, आइसाक लेवितान
Road, Isaac Levitan


रात को गाड़ी चलाता हुआ मैं एक गाँव से गुज़रता हूँ,
कदम बढ़ा कर घर, गाड़ी की हेडलाइट में आ जाते हैं --
वे अब जग चुके हैं, कुछ पीना चाहते हैं.
घर, खलिहान, नाम-तख्तियाँ, वीरान गाड़ी-घर -- अब
सब एक जीवन ओढ़ लेते हैं. मनुष्य सो रहे हैं:

कुछ शांतिपूर्वक सो पाते हैं, औरों के चेहरों पर तनाव है 
मानों अमरत्व के लिए कड़ा प्रशिक्षण कर रहे हों.
गहरी नींद में भी उसे छोड़ने की हिम्मत नहीं कर पाते.
बंद दरवाज़ों की तरह वे इंतज़ार करते रहते हैं 
जबकि रहस्यमय जीवन पास से गुज़रता रहता है.

शहर के बाहर, सड़क बहुत समय तक जंगल में फैली रहती है.
पेड़, पेड़ एक दूसरे से की गई मूक संधि में चुप हैं.
उनका रंग अत्यंत नाटकीय है, मानो आग की रोशनी में हों.
कितना साफ़-साफ़ दिखता है हर पत्ता!
वे घर तक मेरा पीछा करते हैं.

मैं लेटा हूँ और बस सोने ही लगा हूँ,
अपरिचित बिम्ब और चिन्ह अपने आप को बनाते हैं
मेरी पलकों के पीछे वाली अँधेरी दीवार पर.
सोने और जागने के बीच के समय में 
एक बड़ा-सा अक्षर अन्दर आने की कोशिश करता है
पूरी तरह सफल हुए बिना.



-- तोमास त्रांसत्रोमर 



                               
तोमास त्रांसत्रोमर ( Tomas Tranströmer )स्वीडन के लेखक, कवि व अनुवादक हैं जिनकी कविताएँ न केवल स्वीडन में, बल्कि दुनिया भर में सराही गयीं हैं. उन्होंने 13 वर्ष की आयु से ही लिखना शुरू कर दिया था. उनके 12 से अधिक  कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं व उनकी कविताएँ लगभग 50 भाषाओँ में अनूदित की गईं हैं. उन्हें अपने लेखन के लिए अनेक सम्मान प्राप्त हुए है जिनमे इंटरनैशनल पोएट्री फोरम का स्वीडिश अवार्ड भी शामिल है. वे नोबेल प्राइज़ के लिए नामित भी किये गए हैं. लेखन के इलावा वे जाने-माने मनोवैज्ञानिक भी थे, जो कार्य उन्हें स्ट्रोक होने के बाद छोड़ना पड़ा. उनका एक हाथ अभी भी नहीं चलता है, मगर दूसरे हाथ से वे अब भी लिखते हैं. यह कविता उनके अंग्रेजी में अनूदित संकलन ' द हाफ -फिनिश्ड हेवन ' से है.

इस कविता का मूल स्वीडिश से अंग्रेजी में अनुवाद रोबेर्ट ब्लाए ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़