बुधवार, अगस्त 17, 2011

किताबें और प्यार

फ्रेंच नोवेल्ज़, विन्सेंट वान गोग
French Novels, Vincent Van Gogh

वे किताबें 
जिन से कमरे ने खुद को भरा हुआ है 
हवा से तरंगित वीणा की तरह 
झंकृत होती हैं 
जब संतरे के पेड़ों से आई हवा
वहां से होकर बहती है 
और जो अक्षर पन्ने में जड़ा हुआ है 
वहीं रोक लेता है खुद को 
उस कपडे से बने सफ़ेद कागज़ पर 
और इस भड़कीले पतझड़ में 
दूर कहीं युद्ध गरजता है
जो प्रेमिका को प्रेमी के संग 
मार डालता है किसी पुराने किनारे पर.


-- यौं फोलें 



 
यौं फोलें ( Jean Follain ) फ्रांस के कवि, लेखक व मजिस्ट्रेट थे और फ्रेंच के महत्वपूर्ण कवि माने जाते हैं. बहुत समय तक वे दोहरी ज़िन्दगी जीते रहे, एक ओर सरकारी अफसर और दूसरी ओर कवि जो साहित्यिक गोष्ठियों में जाता था, पत्रिकाओं में लेख लिखता था. फिर उन्होंने एक दिन नौकरी छोड़ दी और अनेक देशों का भ्रमण किया. ऐसा लगता था मानो वे नौकरी में गवाएँ साल वापिस अर्जित करना चाहते थे. उनके अनेक कविता व गद्य संकलन प्रकाशित हुए व उनका दूसरी भाषाओँ में अनुवाद भी हुआ. उनकी कविताएँ छोटी, रहस्यमय और लगभग चीनी-जापानी बौद्ध कविताओं-सी लगती है.
इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

सोमवार, अगस्त 15, 2011

एक खाली घर में

फार्महाउसिज़ अमंग ट्रीज़, विन्सेंट वान गोग
Farmhouses Among Trees, Vincent Van Gogh
कोई किसी को पुकार रहा था;
अब वह चुप हो गया हैं. शीशे के बाहर
गुलाब की बेल काँपती है.
जैसे कि हौले-हौले हवा चल रही हो,
मगर नहीं चल रही :
मुझे कुछ सुनाई नहीं देता. 
पल बीतते जाते हैं,
या लगता है कि बीत रहे हैं, और सूरज,
भोज के पेड़ से ऊपर चढ़ा हुआ 
थोड़ी देर टिकता है 
अपनी गोलाकार उतराई से पहले.

दोपहर है. एकांत में रहना
एक बात है, मगर अकेले होना, बोलना 
और किसी का उस बोले को ना सुनना, 
एक ही शब्द को दोबारा बोलना, 
या कोई और, जब तक कि 
मौन का वहां होना अलग-से ना पहचाना जा पाए 
या सोचा जा पाए 
कि आखिर वह मौन वहां है किस लिए...

कोई भी नए सिरे से शुरू नहीं कर सकता 
एकदम सही शब्द ढूँढकर क्रमशः जानवरों, 
पंछियों और पौधों के नाम रखना.
बाड़े के पार कम घना जंगल जगह दे देता है;
रोशनी प्रवेश करती है; रात का बाज़,
उल्लू, नेवला भाग चुके हैं.
भय के पूर्ण अभाव को जानने के लिए 
जो वहां नहीं है उससे नहीं डरना

ही ध्येय बन जाता है, वह सहज प्रवृत्ति 
की अंतिम पाशविक कम्पन. 
हम आगे बढ़ जाते हैं 
या आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं, 
तथ्यों के बीच, स्वयं को व स्वयं के कृत्यों को 
ऐसे नाम देते हुए जैसे कि वे यथार्थ हों.
सूखे पत्ते टहनियों से लिपटे रहते हैं,
जड़ें सहने के लिए कस कर पकडे रहती हैं,
पर कोई आवाज़ आकाश के भ्रम पर
सवाल नहीं उठाती .


-- फिलिप लेवीन 


फिलिप लेवीन ( Philip Levine ) अमरीकी कवि हैं व हाल ही मैं वे अमरीका के पोएट लौरीएट नियुक्त किये गए हैं. उनके माता-पिता रूसी-यहूदी थे व उन्होंने अपने जैसे असंख्य लोगों की तरह अमरीका में शरण ली थी. वे डीट्रॉयट के कार-कारखानों और मजदूरों के माहौल में बड़े हुए व आम आदमी के हाल का, जो एक नाउम्मीद-सी नौकरी सिर्फ अपने परिवार को भुखमरी से बचाए रखने के लिए करता है, उन पर गहरा असर हुआ व उन्होंने तय किया की वे उन लोगों की आवाज़ बनेंगे. अपनी पढाई पूरी कर उन्होंने कई अमरीकी युनिवर्सिटियों में पढ़ाया है. उनके अनेक कविता संकलन व एक निबंध संग्रह भी प्रकाशित हुआ है. उन्होंने अनुवाद भी किए हैं. उन्हें पुलित्ज़र प्राइज़ सहित अन्य कई सम्मान प्राप्त हुए हैं.
इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शनिवार, अगस्त 13, 2011

नाम

द स्ट्रौलर, क्लौद मोने
The Stroller, Claude Monet

ऐसा कब हो गया कि तुम्हारा नाम
एक व्यक्तिवाचक संज्ञा से बदल कर 
बन गया एक मन्त्र?

उसके तीन स्वर 
मोतियों की तरह 
मेरी साँसों के धागे में पिरोए हुए.

उसके व्यंजन 
एक चुम्बन की तरह 
हौले से मेरे होंठों को छूते हुए.

मुझे प्यार है तुम्हारे नाम से.
उसे बार बार बोलती हूँ मैं 
इस गर्मियों की बारिश में.

उसे छुपे हुए देखती हूँ मैं
वर्णमाला में,
एक चाह की तरह.

प्रार्थना की तरह 
रात में उसे करती हूँ मैं 
जब तक हल्के न हो जाएँ उसके अक्षर.

मैं सुनती हूँ तुम्हारे नाम की लय को 
मिलते हुए, मिलते हुए
मिलते हुए हर चीज़ की लय से.


-- कैरल एन डफ्फी


  कैरल एन डफ्फी ( Carol Ann Duffy )स्कॉट्लैंड की कवयित्री व नाटककार हैं. वे मैनचेस्टर मेट्रोपोलिटन युनिवेर्सिटी में समकालीन कविता की प्रोफ़ेसर हैं. 2009 में वे ब्रिटेन की पोएट लॉरीअट नियुक्त की गईं. वे पहली महिला व पहली स्कॉटिश पोएट लॉरीअट हैं. उनके स्वयं के कई कविता संकलन छ्प चुके हैं. उन्होंने कई कविता संकलनों को सम्पादित भी किया है. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक सम्मान व अवार्ड मिल चुके हैं. सरल भाषा में लिखी उनकी कविताएँ अत्यंत लोकप्रिय हैं व स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा भी हैं. यह कविता उनके 2005 में छपे संकलन ' रैप्चर ' से है, जिसे टी एस एलीअट प्राइज़ मिला था.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़  

गुरुवार, अगस्त 11, 2011

टेलीफोन पर बातचीत

द रेड स्क्विरल, आर्चिबाल्ड थोर्नबर्न
The Red Squirrel, Archibald Thornburn

प्यारी-सी, नन्ही-सी गिलहरी, क्या तुम मुझे सुन सकती हो, 
क्या तुम समझ पाती हो जब मैं तुम से बात करता हूँ,
क्या तुम महसूस कर सकती हो कि मैंने तुम्हें उठाया हुआ है 
और हम एक साथ आँगन पार कर रहे हैं
तुम्हे दफ़नाने के लिए उस गड्ढे में जहाँ मिट्टी नर्म व काली है,
क्या तुम सुन पा रही हो कीड़े-मकौडों को, हवा की साँसों को,
क्या तुम सोचती हो; अमरत्व क्या है?
अमरत्व का अर्थ क्या होता है? शायद किसी 
उड़ते विमान की क्षणिक छाया, मंद-मंद बारिश.
क्या तुम महसूस कर सकती हो
कि मैं तुम्हारे बारे में सोच रहा हूँ,
कि कैसे अब तुम नहीं हो,
कि बाकी सब के बीच अब तुम जीवित नहीं रही;
तुम अनूठी थी, जैसे हम सब अनूठे है.
उदाहरण के लिए, मैं मानता हूँ कि मैं एक पिता हूँ,
मानता हूँ कि मैं एक पुत्र हूँ.


-- रयून क्रिस्तियानसन 


रयून क्रिस्तियानसन (Rune Christiansen ) नार्वे  के कवि व उपन्यासकार हैं. 23 वर्ष की आयु में उनका पहला कविता-संग्रह प्रकाशित हुआ ' वेअर द ट्रेन लीव्ज़ द सी '. तब से उन्होंने 9 कविता संकलन व ६बेहद सराहे गए उपन्यास लिखे हैं. उन्हें कई साहित्यिक पुरुस्कार व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अन्य भाषाओं के प्रसिद्द कवियों जैसे एलें बोसके व युजीनियो मोंताले के साथ काम भी किया है.
इस कविता का मूल नार्वेजियन से अंग्रेजी में अनुवाद ऐग्नेज़ स्कॉट लैंगलैंड ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

मंगलवार, अगस्त 09, 2011

इतवार

ला पौन्से, ओग्यूस्त रोदें
La Pensée , Auguste Rodin
एवेन्यू गोबेलां के पेड़ो की कतारों के बीच से
मेरा हाथ पकड़ कर ले जाती है
एक संगमरमर की मूर्ती
आज इतवार है और सिनेमाघर खचाखच भरे हैं
पेड़ की टहनियों पर बैठे पंछी इंसानों को देखते हैं
और मूर्ती मुझे चूम लेती है
मगर कोई नहीं देखता 
सिवाय एक अंधे बच्चे के
जो ऊँगली से इशारा करता है
हमारी ओर.


-- याक प्रेवेर



याक प्रेवेर  ( Jacques Prévert )फ़्रांसिसी कवि व पटकथा लेखक थे. अत्यंत सरल भाषा में लिखी उनकी कविताओं ने उन्हें फ्रांस का विक्टर ह्यूगो के बाद का सबसे लोकप्रिय कवि बना दिया. उनकी कविताएँ अक्सर पेरिस के जीवन या द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के जीवन के बारे में हैं. उनकी अनेक कविताएँ  स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं व प्रसिद्ध गायकों द्वारा गायी गयी  हैं. उनकी लिखी पटकथाओं व नाटकों को भी खूब सराहा गया है. उनकी यह कविता उनके सबसे प्रसिद्द कविता संग्रह 'पारोल' से है.

इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

रविवार, अगस्त 07, 2011

ईश्वर से प्रश्न

द कैथीड्रल, ओग्यूस्त रोदें
The Cathedral, Auguste Rodin 

हे ईश्वर :
जब हम प्यार करते हैं हम पर क्या विजय पा लेता है?
हमारे भीतर गहरे कहीं क्या होने लगता है?
हमारे अन्दर क्या टूट जाता है?
ऐसा कैसे है कि जब प्यार करते हैं 
लौट जाते हैं हम एक बार फिर बचपन में ?
ऐसा कैसे होता है कि पानी की एक बूँद 
बन जाती है सागर 
ताड़ के पेड़ और ऊंचे हो जाते है 
समुद्र का पानी और मीठा 
सूरज एक कीमती हीरों-जड़ा कंगन कैसे बन जाता है
जब हम प्यार करते हैं?

हे ईश्वर :
जब अचानक प्यार घटित होता है 
वह क्या है जो हम अपने में से जाने देते हैं?
वह क्या है जो हम में पैदा हो जाता है?
क्यों हम नन्हे स्कूली बच्चों-से 
सरल और मासूम हो जाते हैं?
और ऐसा क्यों होता है 
कि जब हमारी प्रियतमा हँसती है 
दुनिया करती है हम पर मोगरे की बारिश 
ऐसा क्यों होता है 
कि जब वह हमारे काँधे पर सर रख कर रोती है 
दुनिया एक दुःख भरा पंछी बन जाती है?

हे ईश्वर :
उसे क्या कहते हैं, उस प्यार को
जिसने सदियों-सदियों आदमियों को मार डाला है, 
किलों को जीता है 
शक्तिशाली को नीचा दिखाया है 
निरीह और सीधे-सादे लोगों को पिघलाया है?
ऐसा कैसे होता है कि हमारी प्रेमिका के बाल 
सोने का बिछौना बन जाते हैं
और उसके होंठ मदिरा और अंगूर?
ऐसा कैसे है कि हम आग में से गुज़रते हैं
और आंच का आनंद उठाते हैं?
हम बंदी कैसे बन जाते हैं जबकि हमने प्यार 
विजयी राजा होने के बाद किया होता है?
उस प्यार को हम क्या कहते हैं 
जो चाक़ू की तरह हमारे अन्दर घुस जाता है ?
क्या वह एक सरदर्द है?
क्या वह पागलपन है?
ऐसा कैसे होता है कि बस एक ही पल में 
दुनिया एक हरी-भरी वादी...
एक मधुर-सी जगह बन जाती है
जब हम प्यार करते हैं?

हे ईश्वर :
हमारी बुद्धि को क्या हो जाता है? 
हमें क्या हो जाता है?
ललक का एक पल बरसों लम्बा कैसे हो जाता है 
और माया प्यार में यथार्थ कैसे बन जाती है?
कैसे साल के सप्ताह एक-दूसरे से जुड़े नहीं रह पाते?
ऐसा कैसे होता है कि प्यार मौसमों के भेद मिटा देता है?
तो सर्दियों में गर्मियाँ हो जाती हैं 
और जब हम प्यार करते हैं 
आकाश के बागीचों में गुलाब खिलने लगते हैं ?

हे ईश्वर :
हम प्यार के सामने समर्पण कैसे करें,
कैसे सौंप दे उसको अपने अंतर्मन की चाबी
उसके सामने दिए जलाएँ, सुगंध ले जाएँ 
ऐसा कैसे होता है कि क्षमा मांगते हुए,
हम उसके पैरों में गिर जाते हैं 
ऐसा कैसे होता है कि
हम चाहते हैं उसकी रियासत में दाखिल होना
वह हमें जो भी करे 
वह जो भी करे उसके आगे समर्पित होना.

हे ईश्वर :
अगर तुम सच्चे ईश्वर हो 
तो हमें हमेशा प्रेमी रहने देना.


-- निज़ार क़ब्बानी 


 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 की उम्र से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह छप चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे. 
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद लेना जाय्युसी और डब्ल्यू एस मर्विन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

शुक्रवार, अगस्त 05, 2011

संवेदना

व्हीट फील्ड विद साएप्रस, विन्सेंट वान गोग
Wheat Field With Cypress, Vincent Van Gogh


गर्मियों के नीली शामों में, 
पगडंडियों से मैं गुजरूँगा,
उगते गेहूं का गुदगुदाया, 
कटी घास पर चलता, सपनों में खोया, 
मैं पैरों के नीचे से उठती 
ठंडक महसूस करूँगा, और खुले सर पर 
ठंडी हवाओं को बहने दूंगा.

मैं बोलूँगा नहीं, कुछ सोचूंगा भी नहीं :
मगर एक अनंत प्यार उमड़ेगा 
मेरी आत्मा में,
और मैं निकल जाऊँगा दूर, बहुत दूर, 
एक बंजारे की तरह, 
प्रकृति के साथ भी वैसे ही मग्न 
जैसे किसी औरत के साथ होता हूँ.


-- आरथ्यूर रिम्बो 




Arthur Rimbaud, E. Carjat, 1872 - Wikimedia Commons  आरथ्यूर रिम्बो ( Arthur Rimbaud ) 19 वीं शताब्दी के अंत के फ्रांसीसी कवि थे. उनका सारा लेखन 21 वर्ष की आयु से पहले ही हो गया था. विक्टर ह्यूगो उन्हें 'इन्फंट शेक्सपियर' कहा करते थे. वे बहुत अच्छे विद्यार्थी थे मगर उनका बचपन दुखों से भरा था. 16 वर्ष की आयु में वे घर से भाग कर पेरिस आ गए, जहाँ उनकी मुलाकात उम्र में बड़े व स्थापित कवि पॉल वर्लेन से हुई. अपने 17 वें जन्मदिन से पहले ही उनकी लम्बी कविता 'द ड्रंकन बोट' प्रकाशित हुई, जो उनकी स्वयं की आद्यात्मिक भटकन और खोज का रूपक थी. उसी वर्ष उनकी किताब 'ए सीज़न इन हेल' भी प्रकाशित हुई जिसकी खूब आलोचना हुई. दुखी हो कर रिम्बो ने अपना लिख हुआ सब जला दिया. अब तक वे अपने प्रेमी वर्लेन से भी उकता चुके थे जिन्होंने उन्हें अपने पास रोके रखने के लिय उन पर गोली तक चला दी थी. 19वर्ष की आयु में पूरे यूरोप में भटकने के बाद, वे अफ्रीका चले गए जहाँ वे कोई कारोबार करते रहे. कुछ वर्ष बाद उन्हें मृत समझ वर्लेन ने उनका कविता-संकलन 'इल्यूमिनेशंज़' प्रकाशित करवाया, जिसने साहित्य जगत में सनसनी मचा दी. रिम्बो अब प्रतिष्ठित कवियों में गिने जाने लगे थे मगर अपने यश में उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं रही थी. 37 वर्ष की आयु में उनका कैन्सर से देहांत हो गया.

इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़