गुरुवार, जनवरी 12, 2012

प्रेमिका

पोर्ट्रेट ऑफ़ यssन हेब्युतेर्न, अमेदेओ मोदिग्लिअनि
Portrait of Jeanne Hebuterne, Amedeo Modigliani

वह खड़ी है मेरी पलकों पर 
और मिल रहे हैं उसके केश मेरे बालों में,
मेरे हाथों से लेती है वह आकार,
लेती है रंग वह मेरी आँखों से,
मेरी छाया में वह ऐसे खो जाती है 
जैसे आकाश में कोई पत्थर.

हमेशा खुली ही रहती हैं उसकी आँखें 
और वह मुझे भी सोने नहीं देती 
दिन-दहाड़े आते हैं उसके सपने 
और कई सूरजों की नींद उड़ा जाते हैं,
मुझे हंसाते हैं, रुलाते और हंसाते हैं,
जब कहने को कुछ भी नहीं है तब भी 
न जाने क्या-क्या कहलवा जाते हैं.


--पॉल एलुआर









पॉल एलुआर ( Paul Éluard )फ़्रांसिसी कवि थे व स्यूरेअलीज्म के संस्थापकों में से एक थे. 16 साल की आयु में जब उन्हें टी.बी होने पर स्विटज़र्लैंड के एक सैनिटोरियम में स्वास्थ्य लाभ के लिए भेजा गया, उस समय उनका कविता में रुझान हुआ. उनका पहला कविता संकलन उनके युद्ध में हुए अनुभवों के बाद लिखा गया. उनकी लगभग 70 किताबे प्रकाशित हुई जिनमे, कविता संग्रह व उनके साहित्यिक और राजनैतिक विचार भी हैं. यह कवितांश उनके संकलन " कापिताल द ला दूलर " से है.

इस कविता का मूल फ्रेंच से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़  

मंगलवार, जनवरी 10, 2012

तलाश

न्यूज़, मिकलोयस चिर्लोनिअस
News, Mikalojus Ciurlionis

/...एक पंछी 
फैलाता है अपने पंख --                             क्या वह डरता है 
               कि आकाश ढह जायेगा ?        या कि हवा 
               कोई किताब है उसके पंखों के भीतर छिपी ?
                                                                  उसकी गर्दन 
               जाकर चिपक जाती है क्षितिज से 
               और उसके पंख है शब्द 
               एक भूल-भुलैया में तैरते हुए.../




-- अदुनिस


Adonis, Griffin Poetry Prize 2011 International Shortlist अली अहमद सईद अस्बार ( Ali Ahmed Said Asbar ), जो 'अदुनिस' ( Adonis )के नाम से लिखते हैं, सिरिया के प्रसिद्ध कवि व लेखक हैं. वे आधुनिक अरबी कविता के पथप्रदर्शक हैं, जिन्होंने पुरानी मान्यताओं से विद्रोह कर कविता के अपने ही नियम बनाये हैं. अब तक अरबी में उनकी 20से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनके अनेक कविता संग्रह अंग्रेजी में अनूदित किये जा चुके हैं. अभी हाल-फिलहाल में, अगस्त माह के आखिरी सप्ताह में ही उन्हें 2011 के  गेटे ( Goethe) पुरुस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें जल्द ही नोबेल प्राइज़ भी मिलेगा , साहित्य जगत में इसकी उम्मीद व अटकलें खूब हैं, वे कई बार नामित भी किये गए हैं. यह कविता उनके संकलन 'द बुक ऑफ़ सिमिलैरीटीज़ एंड बिगिनिन्ग्ज़ ' से है.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद खालेद मत्तावा ने किया है.
इस कविता का हिन्दी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

रविवार, जनवरी 08, 2012

सपना

टू साईंप्रेसिज़, विन्सेंट वान गोग
Two Cypresses, Vincent Van Gogh

मैं जाग गया. क्या वह उसकी सांस थी या मेरी अपनी
जिस ने मेरे सपने के कांच को कुहासे से ढँक दिया था?
मेरा मन पहुँच जाता है समय से परे कहीं ...
बगीचे में सरू के पेड़ की काली लौ,
मैदान में नीम्बू की कलियों की खुशबू...
और फिर बादलों को कुछ चीरता है,
और उसकी धूप और बारिश की लालटेन में 
दुनिया उजली हो जाती है, एक आकस्मिक इन्द्रधनुष;
और फिर सब का सब, उल्ट जाता है, 
हो जाता है बहुत छोटा, दिखता है 
उस के काले केशों पर पड़ी बारिश की हर बूँद में !
और मैं उसे जाने देता हूँ फिर से
हवा में उड़ते बुलबुले की तरह...



-- डान पेटरसन


डान पेटरसन ( Don Paterson ) स्कॉटलैंड के कवि,लेखक  व संगीतकार हैं. वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ सेंट एंड्रूज़ में अंग्रेजी पढ़ाते हैं, लन्दन के प्रकाशक 'पिकाडोर' के लिए पोएट्री एडिटर हैं और एक बेहतरीन जैज़ गिटारिस्ट हैं . अपने पहले कविता संकलन 'निल निल' से ही उन्हें पहचाना जाने लगा व अवार्ड मिलने लगे. अपने संकलन ' गाडज़ गिफ्ट टू विमेन ' के लिए उन्हें टी एस एलीअट प्राइज़ प्राप्त हुआ. उनके एक और संकलन 'लैंडिंग लाईट ' को विटब्रेड पोएट्री अवार्ड व फिर से टी एस एलीअट प्राइज़ प्राप्त हुआ. उन्होंने दूसरी भाषाओँ से अंग्रेजी में बहुत अनुवाद भी किया है जिन में से सबसे उल्लेखनीय स्पेनिश कवि अंतोनियो मचादो व जर्मन कवि रिल्के की रचनाएँ हैं. उन्होंने कई कविता संकलनों का संपादन किया है, नाटक लिखे हैं व विशेष रूप से रेडियो नाटक लिखे हैं. यह कविता उनके संकलन 'आईज ' से है, जिसे  स्पेनिश कवि अंतोनियो मचादो की कविताओं का अनुवाद भी कहा जा सकता है, या कहा जा सकता है की ये कविताएँ, उनकी कविताओं से प्रेरित हैं.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शुक्रवार, जनवरी 06, 2012

पहाड़ी की चोटी से

सेलिंग बोट्स, मिकलोयस चिर्लोनिअस
Sailing Boats, Mikalojus Ciurlionis

मैं पहाड़ी पर खड़े हो कर 
देखता हूँ खाड़ी के पार.
सारी नौकाएं तैरती हैं 
गर्मियों की सतह पर.
" हम नींद में चलते हैं. 
हैं दिशाहीन तैरते हुए चाँद."
ऐसा कहते हैं सफ़ेद पाल.

"हम सोते घर में से 
चुपके-से निकल जाते हैं.
हम हौले-से दरवाज़े खोलते हैं.
हम झुक जाते हैं अबद्धता की ओर."
ऐसा कहते हैं सफ़ेद पाल.

कभी देखा था मैंने 
दुनिया की इच्छाशक्तियों को जलयात्रा करते हुए.
सब एक ही प्रवाह में थी -- एक ही बेड़े में.
" हम छितर चुके हैं अब. कोई मार्गरक्षी नहीं."
ऐसा कहते हैं सफ़ेद पाल.


-- तोमास त्रांसत्रोमर 



                               
तोमास त्रांसत्रोमर ( Tomas Tranströmer )स्वीडन के लेखक, कवि व अनुवादक हैं जिनकी कविताएँ न केवल स्वीडन में, बल्कि दुनिया भर में सराही गयीं हैं. उन्हें 2011 का नोबेल पुरुस्कार प्राप्त हुआ है. उन्होंने 13 वर्ष की आयु से ही लिखना शुरू कर दिया था. उनके 12 से अधिक  कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं व उनकी कविताएँ लगभग 50 भाषाओँ में अनूदित की गईं हैं. उन्हें अपने लेखन के लिए अनेक सम्मान प्राप्त हुए है जिनमे इंटरनैशनल पोएट्री फोरम का स्वीडिश अवार्ड भी शामिल है. वे नोबेल प्राइज़ के लिए कई वर्षों से नामित किये जा रहे थे. लेखन के इलावा वे जाने-माने मनोवैज्ञानिक भी थे, जो कार्य उन्हें स्ट्रोक होने के बाद छोड़ना पड़ा. उनका एक हाथ अभी भी नहीं चलता है, मगर दूसरे हाथ से वे अब भी लिखते हैं. यह कविता उनके अंग्रेजी में अनूदित संकलन ' द हाफ -फिनिश्ड हेवन ' से है.

इस कविता का मूल स्वीडिश से अंग्रेजी में अनुवाद रोबेर्ट फुल्टन ने किया है.

इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

बुधवार, जनवरी 04, 2012

शायद कल रात

द ब्लू बर्ड, मार्क शगाल
The Blue Bird, Marc Chagall
एक आखिरी बादल आकाश को पार करता है 
जाता है पश्चिम से पूरब की ओर.
एक आखिरी मधुमक्खी उतरती है
अपने छत्ते के सामने.
एक आखिरी पंछी बगीचे के ऊपर से उड़ कर
झाड़ियों में खो जाता है.
आकाश कि पृष्ठभूमि पर 
मुझे दिखाई देती है,
केवल उसकी जल्दी-जल्दी उड़ती छाया, 
और जहाँ वह हो जाता है नज़र से ओझल, 
एक झूलती हुई टहनी.
क्या वहां उसका घोंसला है?
एक कोर्नक्रेक की कर्कश आवाज़ आती है पास
और पास 
अब वह एकदम बाड़ के पीछे है.
एक और पंछी 
सड़क के पार वाले खेत से 
देता है उसे जवाब. शायद 
वे एक-दूसरे से मिलेंगे 
आज रात.
शायद कल रात.


-- यान काप्लिन्स्की


Author: Estonian Literary Magazine






यान काप्लिन्स्की ( Jaan Kaplinski )एस्टोनिया के कवि, भाषाविद व दार्शनिक हैं व यूरोप के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं. वे अपने स्वतंत्र विचारों व वैश्विक सरोकारों के लिए जाने जाते हैं. उनके कई कविता-संग्रह, कहानियां, लेख व निबंध प्रकाशित हो चुके हैं. उन्होंने कई भाषाओँ से कई भाषाओँ में अनुवाद किये है व उनके स्वयं के लेखन का भी कई भाषाओँ में अनुवाद हुआ है. यह कविता उनके संकलन 'ईवनिंग ब्रिनग्ज़ एवरीथिंग बैक ' से है.
इस कविता का मूल एस्टोनियन से अंग्रेजी में अनुवाद फियोना सैम्प्सन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

सोमवार, जनवरी 02, 2012

कविता के दोस्तों

ट्री ऑफ़ जेसी, मार्क शगाल
Tree Of Jesse, Marc Chagall

मैं आग का पेड़  हूँ,
और चाह का पुजारी,
पचास लाख प्रेमियों का प्रवक्ता.
अपनी ललक लिए लोग सोते हैं मेरी बाहों में 
और कभी मैं बनता हूँ उनके लिए 
सफ़ेद कबूतर 
कभी चमेली का पेड़.
दोस्तों,
मैं वो घाव हूँ जो
हमेशा है अस्वीकार करता
चाक़ू की सत्ता.



-- निज़ार क़ब्बानी




 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 वर्ष की आयु से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 50 से अधिक कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद लेना जाय्युसी और नाओमी शिहाब नाए ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

शनिवार, दिसंबर 31, 2011

एक पल का पन्थ

क्लाक, मार्क शगाल
Clock, Marc Chagall

मैं विश्वास करता हूँ आम दिन में
वह जो यहाँ है इस पल 
और जो मैं भी हूँ.

मुझे वह अपने रास्ते जाता दिखाई नहीं देता 
मगर वह आया कैसा था 
वह भी मैंने नहीं देखा 

उसका विस्तार 
जो भी मुझे लगता है कि मैं जानता हूँ
और जो मेरे लिए वास्तविक है
उस से है कहीं बहुत आगे तक 

वह वर्तमान को उठा ले जाता है 
मगर वह कहाँ जाता है 
जब वह मुझ से दूर चला जाता है 

ऐसी कोई जगह नहीं जानता हूँ मैं 
जो है आज के दिन से बाहर 
मेरे आस-पास के अज्ञात को छोड़कर 

बस वही एक है जो लगता है उपस्थित, 
वही विद्यमान रहता है 
जिस चीज़ को भी मैं 'मेरी' कहता हूँ
उसी ने दी है उधार

यह भी 
कि जिस तरह से मैं विश्वास करता हूँ आज में 
वह जितनी भी देर यहाँ रहता है 
और जो मैं भी होता हूँ


-- डब्ल्यू एस मर्विन
W.S. Merwinडब्ल्यू एस मर्विन ( W S Merwin )अमरीकी कवि हैं व इन दिनों अमरीका के पोएट लॉरीअट भी हैं.उनकी कविताओं, अनुवादों व लेखों के 30 से अधिक संकलन प्रकाशित हो चुके हैं .उन्होंने दूसरी भाषाओँ के प्रमुख कवियों के संकलन, अंग्रेजी में खूब अनूदित किये हैं, व अपनी कविताओं का भी स्वयं ही दूसरी भाषाओँ में अनुवाद किया है.अपनी कविताओं के लिए उन्हें अन्य सम्मानों सहित पुलित्ज़र प्राइज़ भी मिल चुका है.वे अधिकतर बिना विराम आदि चिन्हों के मुक्त छंद में कविता लिखते हैं.यह कविता उनके संकलन 'द शैडो ऑफ़ सिरिअस ' से है.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़