शुक्रवार, जनवरी 25, 2013

कटु बोध

डेथ्स हेड मोथ, विन्सेंट वान गोग
Death's Head Moth, Vincent Van Gogh
हाथ जोड़े, इस आश्रय देते अर्ध-प्रकाश में ही रहो.
लंगड़े चौकीदार के बैठने के लिए कोई जगह नहीं है.
कुर्सियाँ दो सप्ताह पहले ही बेच दी गई थीं. वहाँ आगे,
कुछ बड़े पीपों को धोया जा रहा है. बजरे
बंदरगाह के किनारे पर चढ़े हुए हैं. सड़क पार से
आ रहा है समाचार-वाचक का स्वर.
मैं नहीं सुनना चाहता.
मैं मेज़ से झाड़ता हूँ पतंगे के झुलसे-हुए पंख
जो पिछली रात से यहाँ पड़े हैं, बस इतना जानता हूँ
कि उनका सारा भार उनकी भारहीनता में है.


-- ज्यानिस रीत्ज़ोज़  




 ज्यानिस रीत्ज़ोज़ ( Yannis Ritsos ) एक युनानी कवि और वामपंथी ऐक्टिविस्ट थे. टी बी और दुखद पारिवारिक समस्याओं से त्रस्त, अपने वामपंथी विचारों के लिए उत्पीड़ित, उन्होंने ने कई वर्ष सैनटोरीअमों, जेलों व निर्वासन में बिताये मगर पूरा समय वे लिखते रहे और अनेक कविताएँ, गीत, नाटक लिख डाले, कई अनुवाद भी कर डाले. अपने दुखों के बावजूद, समय के साथ उनके अन्दर ऐसा बदलाव आया कि वे अत्यंत मानवीय हो गए और उनके लेखन में उम्मीद, करुणा और जीवन के प्रति प्रेम झलकने लगा. उनकी 117किताबे प्रकाशित हुई जिनमे कविताओं के साथ-साथ नाटक व निबंध-संकलन भी थे. यह कविता उनके संकलन 'लेट इन्टू द नाईट -- द लास्ट पोएम्ज़ ऑफ़ 
ज्यानिस रीत्ज़ोज़' से है.


इस कविता का मूल ग्रीक से अंग्रेजी में अनुवाद मार्टिन मकिंसी ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

बुधवार, जनवरी 23, 2013

नींद में

अ ड्रीम, ओंरी मातीस
A Dream, Henri Matisse

नींद में प्रेम हुआ,
उठी तो आँख में आँसू थे:
इतना नहीं चाहा है किसी को कभी,
इतना नहीं चाहा है 
मुझे किसी ने कभी.
नहीं था समय एक चुम्बन का भी
न ही पूछने के लिए उसका नाम.
अब मैं काटती हूँ
जाग कर रातें
देखती हूँ स्वप्न उसके.



-- वेरा पाव्लोवा 



 वेरा पाव्लोवा ( Vera Pavlova ) रूस की सबसे प्रसिद्द समकालीन कवयित्री हैं. उनका जन्म मॉस्कोमें हुआ था. उन्होंने संगीत की शिक्षा ग्रहण की व संगीत के इतिहास विषय में विशेषज्ञता प्राप्त की. कुछ समय बाद ही उनकी कविताएँ प्रकाशित हुई और उन्होंने अपने साहित्यिक जीवन का आरम्भ किया. उनके 14 कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं व रूस में उनकी किताबें खूब बिकती हैं. उन्होंने चार ओपेरा लिबेरेतोज़ के लिए संगीत लिखा है व कुछ बोल भी. उनकी कविताएँ 18भाषाओँ में अनूदित की गयी हैं. यह कविता उनके अंग्रेजी में अनूदित संकलन 'इफ देयर इज़ समथिंग टू डिजायर: वन हंड्रेड पोएम्ज़ ' से है.

इस कविता का मूल रशियन से अंग्रेजी में अनुवाद स्टीवन सेमूर ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

सोमवार, जनवरी 21, 2013

मिडनाइट क्लब

पोर्ट्रेट, योर्ज सरा
Portrait, Georges Seurat



जो गुणी हैं उन्होंने बरसों बताया है हमें कि वे चाहते हैं
कि जो वे हैं, उन्हें उसी के लिए प्रेम किया जाए,
कि जो भी उनकी पूर्णता है उसमें, वे हमारी ही तरह
संध्या में मिट जाते हैं. तो वे रात भर काम करते हैं
ठंडे, चाँदनी के जाल-बिछे कमरों में;
कभी-कभी, दिन के समय, वे अपनी गाड़ी से टेक लगा
खड़े रहते हैं, ताकते रहते हैं सुनहरी, भावहीन, तपती
घाटी को, मगर अधिकतर वे बैठते हैं अँधेरे में, झुक कर,
पैर धरती पर, हाथ मेज़ पर, कमीजों में होता है
खून का धब्बा, ठीक हृदय-स्थल के ऊपर.



--  मार्क स्ट्रैन्ड


  मार्क स्ट्रैन्ड ( Mark Strand )एक अमरीकी कवि, लेखक व अनुवादक हैं. 1990 में वे अमरीका के 'पोएट लौरेएट ' थे. वे कई जाने-माने विश्वविद्यालयों में अंग्रेजी पढ़ा चुके हैं और आजकल  कोलम्बिया  युनिवेर्सिटी में अंग्रेजी के प्रोफेसर हैं. उन्हें 'पुलित्ज़र प्राइज़ ' सहित कई सम्मान प्राप्त हुए हैं. अब तक उनकी कविताओं, लेखों व अनुवादों के 30 से भी अधिक संकलन प्रकाशित हो चुके हैं. यह कवितांश उनकी कविता 'जर्नी' से है, जो उनके संकलन 'द कंटीन्यूअस लाइफ' से है.
इस कविता का मूल अंग्रेजी से अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

शनिवार, जनवरी 19, 2013

जब वे मेरी कविताएँ पढ़ें...

चिल्ड्रन एंड सनी ट्रीज़, औगूस्ट मैके
Children and Sunny Trees, August Macke
और जब वे मेरी कविताएँ पढ़ें, 
आशा करता हूँ 
वे सोचें कि मैं हूँ कुछ प्राकृतिक --
जैसे कि वह बूढ़ा बरगद,
जिसकी छाँव में खेलते-खेलते 

थक कर धम्म से बैठ जाते थे
जब वे बच्चे थे,
और पोंछते थे पसीना 
तप रहे माथों का
धारीदार झबलों की आस्तीनों से.



-- फेर्नान्दो पेस्सोआ ( अल्बेर्तो काइरो )



फेर्नान्दो पेस्सोआ ( Fernando Pessoa )20 वीं सदी के आरम्भ के पुर्तगाली कवि, लेखक, समीक्षक व अनुवादक थे और दुनिया के महानतम कवियों में उनकी गिनती होती है. यह कविता उन्होंने अल्बेर्तो काइरो ( Alberto Caeiro )के झूठे नाम से लिखी थी. अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने 72 झूठे नाम या हेट्रोनिम् की आड़ से सृजन किया, जिन में से तीन प्रमुख थे. और हैरानी की बात तो ये है की इन सभी हेट्रोनिम् या झूठे नामों की अपनी अलग जीवनी, स्वभाव, दर्शन, रूप-रंग व लेखन शैली थी. पेस्सोआ के जीतेजी उनकी एक ही किताब प्रकाशित हुई. मगर उनकी मृत्यु के बाद, एक पुराने ट्रंक से उनके द्वारा लिखे 25000 से भी अधिक पन्ने मिले, जो उन्होंने अपने अलग-अलग नामों से लिखे थे. पुर्तगाल की नैशनल लाइब्ररी में उन पन्नों की एडिटिंग का काम आज तक जारी है. यह कविता उनके संकलन 'द कीपर ऑफ़ शीप ' से है.
इस कविता का मूल पुर्तगाली से अंग्रेजी में अनुवाद रिचर्ड ज़ेनिथ ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

गुरुवार, जनवरी 17, 2013

जंगली बतखें

मैलर्डज़ एंड मून, ओहारा कोसोन
Mallards and Moon, Ohara Koson 
तुम्हें अच्छा होने की आवश्यकता नहीं है.
तुम्हें नहीं है आवश्यकता प्रायश्चित करने के लिए
रेगिस्तान में घुटनों के बल सौ मील चलने की.
तुम्हें केवल करने देना है प्रेम अपनी देह के नर्म
जीव को, उस से जिसे वह प्रेम करता है.
मुझे बताओ अपनी निराशा के बारे में
और मैं तुम्हें अपनी के बारे में बताउंगी.
इस बीच दुनिया आगे बढ़ रही है.
इस बीच सूर्य और बारिश के पारदर्शी पत्थर
चलते जा रहे हैं भूदृश्यों के पार,
घास के मैदानों और गहरे पेड़ों के ऊपर से,
पर्वतों और नदियों पर से.
इस बीच, बहुत ऊपर स्वच्छ नीली हवा में,
जंगली बतखें फिर देश लौट रही हैं.
जो भी तुम हो, चाहे कितने भी अकेले,
स्वयं को भेंट करता है यह संसार
तुम्हारी कल्पना को,
इन जंगली बतखों की तरह बुलाता है तुम्हें,
एक कर्कश और उत्तेजित स्वर में,
बार-बार, बताता है तुम्हें तुम्हारा स्थान
इन सब चीज़ों के परिवार में.


-- मेरी ओलिवर


Mary Oliver मेरी ओलिवर ( Mary Oliver )एक अमरीकी कव्यित्री हैं, जो 60 के दशक से कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. उनके 25 से अधिक कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं और बहुत सराहे गए हैं. उन्हें अमरीका के श्रेष्ठ सम्मान 'नेशनल बुक अवार्ड' व 'पुलित्ज़र प्राइज़' भी प्राप्त हो चुके हैं. उनकी कविताएँ प्रकृति की गुप-चुप गतिविधियों के बारे में हैं, जैसे वो धरती और आकाश के बीच खड़ीं सब देख रहीं हैं. और  उनकी कविताओं में उनका अकेलेपन  से प्यार, एक निरंतर आंतरिक एकालाप व स्त्री का प्रकृति से गहरा सम्बन्ध भी दिखाई देता है. यह कविता उनके संकलन 'ड्रीम वर्क' से है.

इस कविता का हिन्दी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

मंगलवार, जनवरी 15, 2013

गीत

रिफ्लेक्शंज़, रॉकस, वाटर, जॉन सिंगर सार्जेंट
Reflections, Rocks, Water, John Singer Sargent

गाओ मेरे साथ इसे अब:
एक पत्थर जितना ही जानते हैं हम;
हम आते हैं एक बिसर चुके समुद्र से,
और जाते हैं एक अपरिचित समुद्र में;
इन दोनों के बीच, खड़ा है एक और,
गूढ़ रहस्य.
तीन बक्से जिनमें ईश्वर जाने क्या है,
सब बंद हैं, खुलेंगे एक खो चुकी चाबी से.
रोशनी नहीं फेंकती स्वयं पर कोई रोशनी,
न ही हमारी ये बुद्धिमत्ता की बातें.
वह क्या है जो 'शब्द' हमें कहता है?
क्या कहता है पत्थरों में बहता पानी?


-- डान पेटरसन



 डान पेटरसन ( Don Paterson ) स्कॉटलैंड के कवि,लेखक  व संगीतकार हैं. वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ सेंट एंड्रूज़ में अंग्रेजी पढ़ाते हैं, लन्दन के प्रकाशक 'पिकाडोर' के लिए पोएट्री एडिटर हैं और एक बेहतरीन जैज़ गिटारिस्ट हैं . अपने पहले कविता संकलन 'निल निल' से ही उन्हें पहचाना जाने लगा व अवार्ड मिलने लगे. अपने संकलन ' गाडज़ गिफ्ट टू विमेन ' के लिए उन्हें टी एस एलीअट प्राइज़ प्राप्त हुआ. उनके एक और संकलन 'लैंडिंग लाईट ' को विटब्रेड पोएट्री अवार्ड व फिर से टी एस एलीअट प्राइज़ प्राप्त हुआ. उन्होंने दूसरी भाषाओँ से अंग्रेजी में बहुत अनुवाद भी किया है जिन में से सबसे उल्लेखनीय स्पेनिश कवि अंतोनियो मचादो व जर्मन कवि रिल्के की रचनाएँ हैं. उन्होंने कई कविता संकलनों का संपादन किया है, नाटक लिखे हैं व विशेष रूप से रेडियो नाटक लिखे हैं. यह कविता उनके संकलन 'आईज ' से है, जिसे  स्पेनिश कवि अंतोनियो मचादो की कविताओं का अनुवाद भी कहा जा सकता है, या कहा जा सकता है की ये कविताएँ, उनकी कविताओं से प्रेरित हैं.


इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

रविवार, जनवरी 13, 2013

आश्रय



शून्य से
जहाँ अर्थ
भटकता है निर्जन वनों में
प्रेम आता है, और ठहर जाता है अद्भुत-सा
हमारी कल्पना से चौड़ा, और ऊंचा

क्या इन्हीं दहकते अंगारों के बीच है आश्रय?




-- अदुनिस



Adonis, Griffin Poetry Prize 2011 International Shortlist अली अहमद सईद अस्बार ( Ali Ahmed Said Asbar ), जो 'अदुनिस' ( Adonis )के नाम से लिखते हैं, सिरिया के प्रसिद्ध कवि व लेखक हैं. वे आधुनिक अरबी कविता के पथप्रदर्शक हैं, जिन्होंने पुरानी मान्यताओं से विद्रोह कर कविता के अपने ही नियम बनाये हैं. अब तक अरबी में उनकी 20से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनके अनेक कविता संग्रह अंग्रेजी में अनूदित किये जा चुके हैं. अभी हाल-फिलहाल में, अगस्त माह के आखिरी सप्ताह में ही उन्हें 2011 के  गेटे ( Goethe) पुरुस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें जल्द ही नोबेल प्राइज़ भी मिलेगा , साहित्य जगत में इसकी उम्मीद व अटकलें खूब हैं, वे कई बार नामित भी किये गए हैं. यह कविता उनके 2003 के संकलन 'बिगिनिन्ग्ज़ ऑफ़ द बॉडी, एंडज़ ऑफ़ द सी' से है.

इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद खालेद मत्तावा ने किया है.
इस कविता का हिन्दी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़