मंगलवार, जून 07, 2011

कहो कि मुझसे प्यार करती हो

ग्रीन इयर्स ऑफ़ व्हीट, विन्सेंट वान गोग 

कहो कि मुझसे प्यार करती हो... 
ताकि मैं सुन्दर हो जाऊं 
कहो कि मुझसे प्यार करती हो...
कि मेरी उँगलियाँ सोने की हो जाएँ 
और मेरा माथा दिये-सा दमके 
कहो कि मुझसे प्यार करती हो 
ताकि मैं पूरी तरह बदल जाऊं 
और बन जाऊं 
एक गेहूं की डाली या एक पेड़  
अब कह भी दो, हिचकिचाओ मत 
कोई-कोई प्यार देर नहीं सह पाते 
कहो कि मुझसे प्यार करती हो 
ताकि मेरा दैवत्व और बढ़ जाए 
और मेरी प्रेम कविताएँ 
बन जाएँ एक पावन ग्रन्थ 
अगर तुम चाहो तो मैं कैलेंडर भी बदल दूंगा 
कुछ मौसम मिटा दूंगा, कुछ जोड़ दूंगा 
और पुराना साल मेरे हाथों में निरस्त्र-सा होगा
मैं औरतों का राज्य स्थापित कर दूंगा.

कहो कि मुझसे प्यार करती हो
ताकि मेरी कविताएँ तरल हो जाएँ 
और मेरी लिखावट बहुत सुन्दर 
अगर तुम मेरी प्रिय होती 
तो मैं घोड़े और जहाज़ लेकर 
सूरज पर चढ़ाई कर देता.
संकोच मत करो...यही एक मौका है
मेरे इश्वर बनने का...या पैगम्बर.

--  निजार क़ब्बानी 

 निज़ार क़ब्बानी ( Nizar Qabbani )सिरिया से हैं व अरबी भाषा के कवियों में उनका विशिष्ट स्थान है. उनकी सीधी सहज कविताएँ अधिकतर प्यार के बारे में हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे क्रन्तिकारी हैं, तो उन्होंने कहा -- अरबी दुनिया में प्यार नज़रबंद है, मैं उसे आज़ाद करना चाहता हूँ. उन्होंने 16 की उम्र से कविताएँ लिखनी शुरू कर दी थीं, और उनके 34 कविता-संग्रह छप चुके हैं. उनकी कविताओं को कई प्रसिद्ध अरबी गायकों ने गया है, जिन में मिस्र की बेहतरीन गायिका उम्म कुल्थुम भी हैं, जिनके गीत सुनने के लिए लोग उमड़ पड़ते थे.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद लेना जाय्युसी और नाओमी शिहाब नाए ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

रविवार, जून 05, 2011

जोड़ा

ल सेर्क्ल देज आमूर, ओग्यूस्त रोदें
Le Cercle Des Amours, Auguste Rodin

वे बत्ती बुझा देते हैं, और पल-भर के लिए 
बल्ब का गोला दमकता रहता है और फिर
अँधेरे के गिलास में दवा की गोली-सा घुल जाता है.
और फिर कुछ ऊपर को बढ़ता है.
होटल की दीवारें तेज़ी-से उठती जाती हैं 
आकाश के अँधेरे की ओर.

उनकी गतिविधियाँ मद्धिम हो गयीं हैं,
और वे सो रहे हैं,
मगर उनके सबसे गहरे छिपे ख्याल 
ऐसे मिलने लगते हैं 
जैसे एक बच्चे के बनाये चित्र में,
गीले कागज़ पर 
दो रंग मिल कर साथ चलते हैं.

नि:शब्द अँधेरा है. फिर भी
शहर आज रात और पास आ गया है.
घर आये हैं, अपनी बुझी हुई खिड़कियाँ लिए. 
खाली चेहरों वाले लोगों की भीड़-से,
खूब सटे हुए, बहुत पास खड़े, 
 वे इंतज़ार कर रहे हैं.


-- तोमास त्रांसत्रोमर 

                               
तोमास त्रांसत्रोमर ( Tomas Tranströmer )स्वीडन के लेखक, कवि व अनुवादक हैं जिनकी कविताएँ न केवल स्वीडन में, बल्कि दुनिया भर में सराही गयीं हैं. उन्होंने 13 वर्ष की आयु से ही लिखना शुरू कर दिया था. उनके 12 से अधिक  कविता संकलन प्रकाशित हो चुके हैं व उनकी कविताएँ लगभग 50 भाषाओँ में अनूदित की गईं हैं. उन्हें अपने लेखन के लिए अनेक सम्मान प्राप्त हुए है जिनमे इंटरनैशनल पोएट्री फोरम का स्वीडिश अवार्ड भी शामिल है. वे नोबेल प्राइज़ के लिए नामित भी किये गए हैं. लेखन के इलावा वे जाने-माने मनोवैज्ञानिक भी थे, जो कार्य उन्हें स्ट्रोक होने के बाद छोड़ना पड़ा. उनका एक हाथ अभी भी नहीं चलता है, मगर दूसरे हाथ से वे अब भी लिखते हैं.
इस कविता का मूल स्वीडिश से अंग्रेजी में अनुवाद रोबेर्ट फुल्टन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

शुक्रवार, जून 03, 2011

साधारण जीवन

काफे तेरास्स ऑन द पलास दयु फोरम, विन्सेंट वान गोग 
एक बेंच पर छूटे
मुड़े-तुड़े से कागज़ पर
लिखा हुआ पढ़ा था मैंने --
जीवन साधारण है हमारा.
दार्शनिकों ने बताया था मुझे, 
हमारा जीवन साधारण है.

साधारण जीवन, साधारण दिन, 
साधारण चिंताएं,
संगीत सम्मलेन, बातचीत,
शहर के बाहर खुली जगहों में घूमना, 
अच्छी खबर, बुरी -- 

मगर चीज़ें और सोच 
जैसे फिर भी आधे-अधूरे थे, 
अधपके.

घर और पेड़ 
कुछ और चाहते थे, 
और गर्मियों में 
हरे घास के मैदानों ने, 
ज्वालामुखीय गृह को 
ऐसे ढँक लिया था
जैसे समुद्र पर 
उछाल  के फेंका गया ओवरकोट.

अँधेरे सिनेमाघर रोशनी को तरसते हैं,
जंगल उत्तेजित साँसें लेते हैं,
बादल हौले-हौले गाते हैं,
एक सुनहरा पंछी
बारिश की कामना करता है. 
साधारण जीवन चाहता है, इच्छा करता है.


-- आदम ज़गायेव्स्की 


  •  
आदम ज़गायेव्स्की पोलैंड के कवि, लेखक, उपन्यासकार व अनुवादक हैं. वे क्रैको में रहते हैं मगर इन दिनों वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ शिकागो में पढ़ाते हैं. वहां एक विषय जो वे पढ़ाते हैं वह है उनके साथी पोलिश कवि चेस्वाफ़ मीवोश की कविताएँ. उनके अनेक कविता व निबंध संकलन छ्प चुके हैं, व अंग्रेजी में उनकी कविताओं व निबंधों का अनुवाद भी खूब हुआ है. 
इस कविता का मूल पोलिश से अंग्रजी में अनुवाद क्लेर कवन्नाह ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

बुधवार, जून 01, 2011

लाइलैक की टहनियाँ हवा में झूल रही हैं...

लाइलैकस, विन्सेंट वान गोग
Lilacs, Vincent Van Gogh

लाइलैक की टहनियाँ हवा में झूल रही हैं 
और बालकॉनी के खुले दरवाज़े से
ज़मीन पर सरकती आती 
उनकी छाया भी झूल रही है.
आज मैंने खिडकियों के शीशे साफ़ किये
और बहुत देर तक उदास रहा:
अचानक सबकुछ 
इतना साफ़, इतना पास, 
इतना इस पल में प्रतिष्ठित था, 
कि मेरा दूर होना 
और स्पष्ट हो गया,
और उदास लगने लगा.
क्या केवल किसी पतझड़ के अंत में, 
किसी जंगल में 
मिला हूँ मैं अपने दोस्तों से:
नन्हे पंछियों से, देवदारों से?
क्या वहां मैं खुद से भी मिल चुका हूँ? 
यह उदासी कहाँ से आती है?
सूरज आगे बढ़ जाता है.
हवा थम जाती है.
लाइलैक की टहनियों की छाया 
ओझल होने से पहले 
किताबों की शेल्फ पर झूलती रहती है.


-- यान काप्लिन्स्की

Author: Estonian Literary Magazine  






यान काप्लिन्स्की ( Jaan Kaplinski )एस्टोनिया के कवि, भाषाविद व दार्शनिक हैं व यूरोप के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं. वे अपने स्वतंत्र विचारों व वैश्विक सरोकारों के लिए जाने जाते हैं. उनके कई कविता-संग्रह, कहानियां, लेख व निबंध छप चुके हैं. उन्होंने कई भाषाओँ से कई भाषाओँ में अनुवाद किये है व उनके स्वयं के लेखन का भी कई भाषाओँ में अनुवाद हुआ है. यह कविता उनके संकलन 'ईवनिंग ब्रिनग्ज़ एवरीथिंग बैक ' से है.
इस कविता का मूल एस्टोनियन से अंग्रेजी में अनुवाद फियोना सैम्प्सन ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

मंगलवार, मई 31, 2011

छिपा हुआ

ईस्टर्न वुमंज़ हेड, जोर्जिओ द किरीको
Eastern Woman' Head, Giorgio De Chirico
अगर तुम एक फ़र्न को 
एक पत्थर के नीचे रख दोगे
तो अगले ही दिन
वह मुरझा, 
अदृश्य-सा हो जायेगा,
मानो पत्थर उसे निगल गया हो.

जिसे तुम प्यार करते हो,
अगर तुम उसका नाम 
बिन बोले बहुत समय 
दबा के रख लेते हो 
ज़ुबान के नीचे 
तो वह खून बन जाता है,
आह बन जाता है.
वह हौले-से अन्दर खींची हवा
तुम्हारे हर शब्द के पीछे 
छिपी होती है. 

जिस से तुम्हारी लौ जलती है 
उसे कोई देख नहीं सकता.


-- नाओमी शिहाब नाए



                                                                                                                                                                                                                     
    

नाओमी शिहाब नाए एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शनिवार, मई 28, 2011

देव देव हैं क्योंकि...

रोज़िज़ एंड बीटल, विन्सेंट वान गोग
Roses And Beetle, Vincent Van Gogh
नियति को निभाओ,
अपने पौधों को पानी दो, 
अपने फूलों से प्यार करो. 
बाकी सब 
अनजाने पेड़ों की छाया है. 

यथार्थ हमेशा, 
जो हम चाहते हैं,
उस से कम या 
उस से अधिक ही होता है. 
केवल हम ही 
स्वयं के तुल्य होते हैं. 

अकेले रहना अच्छा है, 
और सादगी से रहना 
बहुत ही अच्छा.
दुःख को देवों के चरणों में 
भेंट-सा चढ़ा दो. 

जीवन को दूर से देखो.
कभी सवाल मत करो. 
तुम्हें बताने के लिए
उसके पास कुछ भी नहीं है.
उत्तर देवों से भी आगे है कहीं.

मगर चुपचाप अपने मन में 
देवों का अनुसरण करो.
देव देव हैं
क्योंकि वे कभी नहीं सोचते
कि वे क्या हैं.

-- फेर्नान्दो पेस्सोआ ( रिकार्दो रेइस)

 फेर्नान्दो पेस्सोआ ( Fernando Pessoa )20 वीं सदी के आरम्भ के पुर्तगाली कवि, लेखक, समीक्षक व अनुवादक थे और दुनिया के महानतम कवियों में उनकी गिनती होती है. यह कविता उन्होंने रिकार्दो रेइस ( Ricardo Reis )के झूठे नाम से लिखी थी. अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने 72 झूठे नामों या हेट्रोनिम् की आड़ से सृजन किया, जिन में से तीन प्रमुख थे. और हैरानी की बात तो यह है की इन सभी हेट्रोनिम् या झूठे नामों की अपनी अलग  जीवनी, दर्शन, स्वभाव, रूप-रंग व लेखन शैली थी. पेस्सोआ  के जीतेजी उनकी एक ही किताब प्रकाशित हुई. मगर उनकी मृत्यु के बाद, एक पुराने ट्रंक से उनके द्वारा लिखे 25000 से भी अधिक पन्ने  मिले, जो उन्होंने अपने अलग-अलग नामों से लिखे थे. पुर्तगाल की नैशनल लाइब्रेरी में इनके सम्पादन का काम आज भी जारी है. यह कविता उनके संकलन 'ओड्ज़' से है.
इस कविता का मूल पोर्त्युगीज़ से अंग्रेजी में अनुवाद रिचर्ड ज़ेनिथ ने किया है.

इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़ 

गुरुवार, मई 26, 2011

उन में से एक तितली

पोप्पीज़ एंड बटरफ्लाइज, विन्सेंट वान गोग 
Poppies and butterflies, Vincent Van Gogh
सुख की मुश्किल ही यही है
कि उसे वक़्त का कुछ अंदाज़ा नहीं होता
बिन बताए सामने आ खड़ा हो जाता है
और इस से पहले कि मैं समझूँ
कि वह यहाँ था
वह जा चुका होता है
वह अपहचाना-सा
खड़ा रह सकता है मेरे सामने
जबकि मैं कहीं और ही हो सकता हूँ
कुछ और याद करता हुआ
किसी दूसरे युग में
किसी ऐसे को ढूँढता हुआ
जो सालों से नहीं दिखा
और फिर दिखेगा भी नहीं इस दुनिया में
और ऐसा लगता है
कि वह जिस से मैं अनभिज्ञ था
जब वह यहाँ था
उस सुख को
अब संजो पा रहा हूँ मैं
हालाँकि अभी भी वह पहुँच से बाहर है
और उसे पकड़ा नहीं जा सकता
ना ही उसका नाम रखा जा सकता है
ना ही उसे वापिस बुलाया जा सकता है
और अगर मैं उसको रोक पाता
जैसा कि मैं चाहता हूँ
वह सिर्फ और सिर्फ
दुःख ही बन कर रह जाता

-- डब्ल्यू एस मर्विन 

W.S. Merwinडब्ल्यू एस मर्विन ( W S Merwin )अमरीकी कवि हैं व इन दिनों अमरीका के पोएट लॉरीअट भी हैं.उनकी कविताओं, अनुवादों व लेखों के 30 से अधिक संकलन प्रकाशित हो चुके हैं .उन्होंने दूसरी भाषाओँ से अंग्रेजी में बहुत अनुवाद किया है व अपनी कविताओं का भी स्वयं ही दूसरी भाषाओँ में अनुवाद किया है.अपनी कविताओं के लिए उन्हें अन्य सम्मानों सहित पुलित्ज़र प्राइज़ भी मिल चुका है.वे अधिकतर बिना विराम आदि चिन्हों के मुक्त छंद में कविता लिखते हैं.यह कविता उनके संकलन 'द शैडो ऑफ़ सिरिअस ' से है.

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़