रविवार, जून 17, 2012

नया

सनराइज़, यान स्लयुटरज़
Sunrise, Jan Sluyters
आसानी से
आगे बढ़ना.
कहीं और होने की
आवश्यकता ना होना.
किसी भी दुकान से
कुछ भी ना चाहना.
उठाना ऐसी चीज़ को
जो पहले-से पास थी
और उसे दोबारा रखना
नई जगह पर.
जागी हुई आँख का
नयी तरह से देखना.
ये सब क्या करता है
पुराने रक्त को जो बहता रहता है
अपनी वाहिकाओं में? 




-- नाओमी शिहाब नाए 



नाओमी शिहाब नाए ( Naomi Shihab Nye )एक फिलिस्तीनी-अमरीकी कवयित्री, गीतकार व उपन्यासकार हैं. वे बचपन से ही कविताएँ लिखती आ रहीं हैं. फिलिस्तीनी पिता और अमरीकी माँ की बेटी, वे अपनी कविताओं में अलग-अलग संस्कृतियों की समानता-असमानता खोजती हैं. वे आम जीवन व सड़क पर चलते लोगों में कविता खोजती हैं. उनके 7 कविता संकलन और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं. अपने लेखन के लिए उन्हें अनेक अवार्ड व सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अनेक कविता संग्रहों का सम्पादन भी किया है. यह कविता उनके संकलन " यू एंड युअर्ज़ " से है.  

इस कविता का मूल अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़

शुक्रवार, जून 15, 2012

दिया

पॉल गौगेंज़ आमचेयर, विन्सेंट वान गोग
Paul Gauguin's Chair, Vincent Van Gogh



एक कड़ुआ-सा उनींदापन 
आ जाता है अपने दिए जलाने

क्या मैं अपने प्रेम के पत्र उनकी स्याही को लौटा दूँ?
क्या मैं इन तस्वीरों को फाड़ दूँ?

मैं पढ़ता हूँ अपनी देह अब
और भरता हूँ इस लम्बी रात के दिए को उदासी से 





--  अदुनिस 





Adonis, Griffin Poetry Prize 2011 International Shortlist अली अहमद सईद अस्बार ( Ali Ahmed Said Asbar ), जो 'अदुनिस' ( Adonis )के नाम से लिखते हैं, सिरिया के प्रसिद्ध कवि व लेखक हैं. वे आधुनिक अरबी कविता के पथप्रदर्शक हैं, जिन्होंने पुरानी मान्यताओं से विद्रोह कर कविता के अपने ही नियम बनाये हैं. अब तक अरबी में उनकी 20से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनके अनेक कविता संग्रह अंग्रेजी में अनूदित किये जा चुके हैं. अभी हाल-फिलहाल में, अगस्त माह के आखिरी सप्ताह में ही उन्हें 2011 के  गेटे ( Goethe) पुरुस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें जल्द ही नोबेल प्राइज़ भी मिलेगा , साहित्य जगत में इसकी उम्मीद व अटकलें खूब हैं, वे कई बार नामित भी किये गए हैं. यह कविता उनके 2003 के संकलन 'बिगिनिन्ग्ज़ ऑफ़ द बॉडी, एंडज़ ऑफ़ द सी' से है.
इस कविता का मूल अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद खालेद मत्तावा ने किया है.
इस कविता का हिन्दी में अनुवाद -- रीनू  तलवाड़

बुधवार, जून 13, 2012

क्या समय नहीं हुआ है

द प्रोमेनाद, मार्क शगाल
The Promenade, Marc Chagall



क्या समय नहीं हुआ है
स्वयं को प्रियतम से मुक्त करने का
जब कि, कांपते हुए, हम भोग रहे हैं प्रेम को?
जैसे तीर सहता है प्रत्यंचा का तनाव
ताकि, छोड़े जाने पर, वह दूर तक जा सके.
क्योंकि ठहरने की कोई जगह नहीं है.




 -- रायनर मरीया रिल्के 




रायनर मरीया रिल्के ( Rainer Maria Rilke ) जर्मन भाषा के सब से महत्वपूर्ण कवियों में से एक माने जाते हैं. वे ऑस्ट्रिया के बोहीमिया से थे. उनका बचपन बेहद दुखद था, मगर यूनिवर्सिटी तक आते-आते उन्हें साफ़ हो गया था की वे साहित्य से ही जुड़ेंगे. तब तक उनका पहला कविता संकलन प्रकाशित भी हो चुका था. यूनिवर्सिटी की पढाई बीच में ही छोड़, उन्होंने रूस की एक लम्बी यात्रा का कार्यक्रम बनाया. यह यात्रा उनके साहित्यिक जीवन में मील का पत्थर साबित हुई. रूस में उनकी मुलाक़ात तोल्स्तॉय से हुई व उनके प्रभाव से रिल्के का लेखन और गहन होता गुया. फिर उन्होंने पेरिस में रहने का फैसला किया जहाँ वे मूर्तिकार रोदें के बहुत प्रभावित रहे.यूरोप के देशों में उनकी यात्रायें जारी रहीं मगर पेरिस उनके जीवन का भौगोलिक केंद्र बन गया. पहले विश्व युद्ध के समय उन्हें पेरिस छोड़ना पड़ा, और वे स्विटज़रलैंड में जा कर बस गए, जहाँ कुछ वर्षों बाद ल्यूकीमिया से उनका देहांत हो गया. कविताओं की जो धरोहर वे छोड़ गए हैं, वह अद्भुत है. यह अंश उनकी "दुईनो एलेजीज़ " से है।
इस कविता का जर्मन से अंग्रेजी में अनुवाद जोआना मेसी व अनीता बैरोज़ ने किया है. 
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़
 

सोमवार, जून 11, 2012

उम्मीद

द गार्डन गेट, क्लौद मोने
The Garden Gate, Claude Monet
उम्मीद तुम्हारे साथ है जब तुम विश्वास करते हो
कि यह धरती स्वप्न नहीं है, जीती-जागती देह है,
कि दृष्टि, स्पर्श और श्रवण झूठ नहीं बोलते,
कि यहाँ जो सब तुमने कभी देखा है,
फाटक के बाहर से देखे बगीचे जैसा है.

तुम अन्दर नहीं जा सकते. 

मगर तुम्हें पूर्ण विश्वास है कि वह है. अगर 
हम थोड़ा और ध्यान और समझदारी से देख सकते
तो बगीचे में कहीं हम खोज निकालते
एक अनोखा नया फूल और एक अनाम नक्षत्र.

कुछ लोग कहते हैं कि हमें नहीं करना चाहिए 

अपनी आँखों पर विश्वास,
कि कुछ वास्तव में है ही नहीं, केवल एक प्रतीति है,
ये वहीं लोग हैं जिन्हें कोई भी उम्मीद नहीं.
वे सोचते हैं कि जिस पल हम मुँह फेर लेते हैं,
हमारी पीठ के पीछे 

दुनिया का अस्तित्व ही नहीं रहता,
मानो चोरों के हाथों ने हर लिया हो. 




-- चेस्वाफ़ मीवोश 




चेस्वाफ़ मीवोश (Czeslaw Milosz) पोलैंड के प्रसिद्द कवि, लेखक व अनुवादक थे. उनका जन्म लिथुएनिया में हुआ था और वे पांच भाषाएँ जानते थे -- पोलिश, लिथुएनिअन,रशियन, अंग्रेजी व फ्रेंच. द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात,1951 में उन्होंने पोलैंड छोड़ फ्रांस में आश्रय लिया, और 1970 में अमरीका चले गए. वहां वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया में पोलिश साहित्य के प्रोफ़ेसर रहे. उनके 40 से भी अधिक कविताओं व लेखों के संकलन प्रकाशित हुए हैं व कई भाषाओँ में अनूदित किये गए हैं. अन्य कई सम्मानों सहित उन्हें 1980 में नोबेल प्राइज़ भी मिल चुका है.
इस कविता का मूल पोलिश से अंग्रेजी में अनुवाद रोबेर्ट हास व रोबेर्ट पिन्सकी ने किया है.
इस कविता का हिंदी में अनुवाद -- रीनू तलवाड़